Sunday, March 11, 2012

वेद,उपनिषद,पुराण

वेद - वेद चार हैं, ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद। इन्हें दुनिया की सबसे पुरानी पुस्तकें माना गया है। नासा ने भी इसकी प्रामाणिकता स्वीकार की है। ये चारों वेद एक ही वेद के चार भाग हैं, जिन्हें वेद व्यास ने संपादित किया है। ऋग्वेद में सृष्टि की परिस्थितियों, देवताओं आदि की स्थितियों के बारे में विवरण है। सामवेद ऋग्वेद का ही गेय रूप है, इसके सारे श्लोक गेय यानी संगीतमय या गीतमय हैं। यजुर्वेद - यजुर्वेद में यज्ञ संबंधी श्लोक हैं, यज्ञों की विधियां और उससे देवताओं को प्रसन्न करने संबंधी विधियां हैं। अथर्ववेद - इस वेद में परा शक्तियों यानी पारलौकिक शक्तियों के श्लोक हैं।

उपनिषद - उपनिषद को यह नाम इसलिए मिला है क्योंकि ये वेदों के ही हिस्से हैं। वेदों से ही प्रेरित इन उपनिषदों की रचना वेदव्यास के ही चार शिष्यों ने की है। मूलत: ़108 उपनिषद माने जाते हैं। उपनिषद का अंग्रेजी में अर्थ है कॉलोनी। जैसे शहर के ही किसी एक हिस्से को कॉलोनी कहते हैं, वैसे ही उपनिषदों को भी वेदों का ही हिस्सा माना जाता है। वेदों के ही श्लोकों को कथानक के रूप में उपनिषदों में लिया जाता है।

पुराण - पुराण पिछले युगों सतयुग, त्रेता और द्वापर युग की कथाओं का विवरण हैं। इनकी भी रचना वेद व्यास और उनके समकालीन ऋषियों द्वारा की गई है। ये मूलत: पौराणिक पात्रों की कथाओं के ग्रंथ हैं। पुराणों की संख्या 18 मानी गई है। कालांतर में कई ग्रंथ बढ़ गए हैं।

धर्मं ग्रन्थ एवं एतिहासिक ग्रन्थ :-

धर्मं ग्रन्थ एवं एतिहासिक ग्रन्थ :-

भारत का सर्व प्राचीन  धर्मं ग्रन्थ वेद है जिसके संकलनकर्ता महर्षि कृषण द्व्य्पायण वेदव्यास है
वेद चार है


Monday, March 5, 2012

भारत का इतिहास

भारत का इतिहास

उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में समुद्र तक फेला यह उपमहादीप भारतवर्ष के नाम से ज्ञात है जिसे महाकाव्य तथा पुराण या है में भारतवर्ष अथार्थ भरत का देश तथा यहाँ के निवासियों को भारती कहा गया है

प्राचीन भारत

प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत
१ धर्मं ग्रन्थ
२ एतिहासिक ग्रन्थ
३ विदेशियों का विवरण
४ पुरातत्व सम्बन्धी साक्ष्य